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Showing posts from November, 2017

Popular Domain Tools, Domain Name Select Karne Ke Liye

यदि आप चाहते हैं कि आपके पास अपना ब्लॉग हो जिसकी मदद से आप अपना knowledge दूसरे लोगों तक पहुंचाएं और इसके साथ-साथ बहुत सारा पैसा भी कमायें, लेकिन इसके लिए आपको अपना ब्लॉग बनाने के लिए एक रणनीति बनानी होगी जिसको follow करते हुए आप एक बहुत अच्छे ब्लॉगर के रूप में पहचान बना सकते हैं। अपना ब्लॉग बनाने के लिए आपको सबसे पहले ब्लॉग के नाम के बारे में सोचना होगा। इसके लिए आपको ऐसा नाम choose करना है जो Unique हो या फिर आपके ब्लॉग का नाम ऐसा हो जिससे ये पता चले कि आपका ब्लॉग किस subject या  niche  के बारे में है। इस काम के लिए Domain Tools की मदद ले सकते हैं। इस post में आप यही जानेंगे कि 4 Best Domain Tools के बारे में बताने जा रहा हूँ जो आपको सही blog domain name खोजने में मदद करेंगे। Domain tools से website के लिए सही Domain चुनें : अब आपको अपने ब्लॉग के domain के बारे में अच्छे से सोचना होगा। दोस्तों जब हम कोई new blog या site बनाते हैं तब हमारे सामने बहुत से कारण होते हैं जिन्हे हमें हमेशा दिमाग में रखकर चलना पड़ता है जैसे blog या website name और Domain Name. यदि...

काजल अग्रवाल

                                                                   काजल अग्रवाल                                                            जन्म                                19 जून 1985 (आयु 32)                           मुंबई , महाराष्ट्र , भारत                        ...

अभी तक का भोजपुरी का सबसे धमाकेदार गाना

                                                                                                                 Neeche Link Me Click                                                अभी तक का भोजपुरी का सबसे धमाकेदार गाना

उत्तर प्रदेश विधान सभा

उत्तर प्रदेश विधान सभा उत्तर प्रदेश विधान सभा (भारत) सत्रहवीं सभा प्रकार प्रकार द्विसदनीय नेतृत्व उपसभापति ख़ाली Structure सीटें 404 (3 ख़ाली) Political groups      सपा (47)      बसपा (18)      BJP (325)      कांग्रेस (07)      RLD (1)      स्वतन्त्र (6)      Nominated (1) चुनाव 11 फ़रवरी से 8 मार्च 2017 बैठक स्थान विधान भवन , लखनऊ भारत के उत्तर प्रदेश राज्य के द्विसदनी विधायिका के निचले सदन का नाम उत्तर प्रदेश विधान सभा है। इसमें कुछ ४०४ सदस्य होते हैं जिसमें एक आंग्ल-भारतीय (ऐंग्लो-इण्डियन) भी सम्मिलित है जो राज्यपाल द्वारा नामित होता है। इतिहास स्वतन्त्रता-पूर्व संयुक्त प्रान्त के लिए विधान सभा पहली बार 1 अप्रैल 1937 को भारत सरकार अधिनियम, 1935 के अधीन प्रस्थापित हुई। 1935 के अधिनियम के तहत, सभा की ताक़त 228 निर्धारित हु...

उत्तर प्रदेश विधान परिषद

उत्तर प्रदेश विधान परिषद उत्तर प्रदेश विधान परिषद या उत्तर प्रदेश लेजिस्लेटिव काउंसिल , उत्तर भारत में उत्तर प्रदेश राज्य के द्विमासिक विधानमंडल का ऊपरी सदन है। उत्तर प्रदेश भारत के सात राज्यों में से एक है, जहां राज्य विधानमंडल द्विगुणित है, इसमें दो सदन शामिल हैं: विधान सभा (लेजिस्लेटिव असेंबली) और विधान परिषद (लेजिस्लेटिव काउंसिल)। विधान परिषद एक स्थायी सभा है, इसमें 100 सदस्य हैं।

विधान परिषद

विधान परिषद कुछ भारतीय राज्यों में लोकतंत्र की ऊपरी प्रतिनिधि सभा है। इसके सदस्य अप्रत्यक्ष चुनाव के द्वारा चुने जाते हैं। कुछ सदस्य राज्यपाल के द्वारा मनोनित किए जाते हैं। विधान परिषद विधानमंडल का अंग है। आंध्र प्रदेश , बिहार , जम्मू-कश्मीर , कर्नाटक , महाराष्ट्र , तेलंगाना और उत्तर प्रदेश के रूप में, ( उन्तीस में से ) सात राज्यों में विधान परिषद है। इसके अलावा, राजस्थान और असम को भारत की संसद ने अपने स्वयं के विधान परिषद बनाने की मंजूरी दे दी है। गठन संविधान के अनुच्छेद 169,171(1) एवं 171(2) में विधान परिषद के गठन का प्रावधान है। इसकी प्रक्रिया निम्न प्रकार है: विधानसभा में उपस्थित सदस्यों के दो तिहाई बहुमत से पारित प्रस्ताव को संघीय संसद के पास भेजा जाता है। तत्पश्चात अनुच्छेद 171(2) के अनुसार लोकसभा एवं राज्यसभा साधारण बहुमत से प्रस्ताव पारित करती है। राष्ट्रपति के हस्ताक्षर हेतु इस प्रस्ताव को उनके पास प्रेषित(भेजना) कर दिया जाता है। राष्ट्रपति के हस्ताक्षर होते ही विधान परिषद के गठन की मंजूरी मिल जाती है। सदस्य कार्यकाल इसके सदस्यों का कार्यकाल छह वर्षों...

द्विसदनीयता

सरकारी व्यवथाओं में द्विसदनीयता (bicameralism) उस विधि को कहते हैं जिसमें विधायिका (legislature) में दो सदन हों। उदाहरण के लिये भारतीय संसद में दो सदन हैं: लोक सभा और राज्य सभा । इसके विपरीत फ़िलिपीन्स जैसे कुछ देशों में एकसदनीय (unicameral) संसदें हैं। [1] उदाहरण यह प्रणाली भारत, ब्रिटेन, सोवियत संघ, अमरीका आदि देशों में प्रचलित है। इसके विपरीत चीन, नेपाल, चेकोस्लोवाकिया आदि कुछ ऐसे देश हैं, जहाँ विधायिका में एक सदन ही है। ऐसी व्यवस्था को एक सदनीय प्रणाली कहा जाता है। मध्यकालीन विधायिकाओं में कहीं-कहीं तीन, चार या पाँच सदन होते थे जिममें प्रत्येक सदन समाज के किसी वर्ग या जागीर का प्रतिनिधित्व करता था।

लोक सभा

लोक सभा , भारतीय संसद का निचला सदन है। भारतीय संसद का ऊपरी सदन राज्य सभा है। लोक सभा सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार के आधार पर लोगों द्वारा प्रत्यक्ष चुनाव द्वारा चुने हुए प्रतिनिधियों से गठित होती है। भारतीय संविधान के अनुसार सदन में सदस्यों की अधिकतम संख्या 552 तक हो सकती है, जिसमें से 530 सदस्य विभिन्न राज्यों का और 20 सदस्य तक केन्द्र शासित प्रदेशों का प्रतिनिधित्व कर सकते हैं। सदन में पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं होने की स्थिति में भारत का राष्ट्रपति यदि चाहे तो आंग्ल-भारतीय समुदाय के दो प्रतिनिधियों को लोकसभा के लिए मनोनीत कर सकता है। लोकसभा की कार्यावधि 5 वर्ष है परंतु इसे समय से पूर्व भंग किया जा सकता है इतिहास प्रथम लोक सभा 1952 पहले आम चुनाव होने के बाद देश को अपनी पहली लोक सभा मिली। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस 245 सीटों के साथ जीत हासिल करके सत्ता में पहुँची। इसके साथ ही जवाहर लाल नेहरू भारत के पहले प्रधानमंत्री बने। राज्यों के अनुसार सीटों की संख्या भारत के प्रत्येक राज्य को उसकी जनसंख्या के आधार पर लोकसभा-सदस्य मिलते है। वर्तमान मे यह 1971की जनसंख्या पर आधा...

राज्य सभा

राज्य सभा भारतीय लोकतंत्र की ऊपरी प्रतिनिधि सभा है। लोकसभा निचली प्रतिनिधि सभा है। राज्यसभा में 250 सदस्य होते हैं। जिनमे 12 सदस्य भारत के राष्ट्रपति के द्वारा नामांकित होते हैं। इन्हें 'नामित सदस्य' कहा जाता है। अन्य सदस्यों का चुनाव होता है। राज्यसभा में सदस्य 6 साल के लिए चुने जाते हैं, जिनमे एक-तिहाई सदस्य हर 2 साल में सेवा-निवृत होते हैं। किसी भी संघीय शासन में संघीय विधायिका का ऊपरी भाग संवैधानिक बाध्यता के चलते राज्य हितों की संघीय स्तर पर रक्षा करने वाला बनाया जाता है। इसी सिद्धांत के चलते राज्य सभा का गठन हुआ है। इसी कारण राज्य सभा को सदनों की समानता के रूप में देखा जाता है जिसका गठन ही संसद के द्वितीय सदन के रूप में हुआ है। राज्यसभा का गठन एक पुनरीक्षण सदन के रूप में हुआ है जो लोकसभा द्वारा पास किये गये प्रस्तावों की पुनरीक्षा करे। यह मंत्रिपरिषद में विशेषज्ञों की कमी भी पूरी कर सकती है क्योंकि कम से कम 12 विशेषज्ञ तो इस में मनोनीत होते ही हैं। आपातकाल लगाने वाले सभी प्रस्ताव जो राष्ट्रपति के सामने जाते हैं, राज्य सभा द्वारा भी पास होने चाहि...