यदि आप चाहते हैं कि आपके पास अपना ब्लॉग हो जिसकी मदद से आप अपना knowledge दूसरे लोगों तक पहुंचाएं और इसके साथ-साथ बहुत सारा पैसा भी कमायें, लेकिन इसके लिए आपको अपना ब्लॉग बनाने के लिए एक रणनीति बनानी होगी जिसको follow करते हुए आप एक बहुत अच्छे ब्लॉगर के रूप में पहचान बना सकते हैं। अपना ब्लॉग बनाने के लिए आपको सबसे पहले ब्लॉग के नाम के बारे में सोचना होगा। इसके लिए आपको ऐसा नाम choose करना है जो Unique हो या फिर आपके ब्लॉग का नाम ऐसा हो जिससे ये पता चले कि आपका ब्लॉग किस subject या niche के बारे में है। इस काम के लिए Domain Tools की मदद ले सकते हैं। इस post में आप यही जानेंगे कि 4 Best Domain Tools के बारे में बताने जा रहा हूँ जो आपको सही blog domain name खोजने में मदद करेंगे। Domain tools से website के लिए सही Domain चुनें : अब आपको अपने ब्लॉग के domain के बारे में अच्छे से सोचना होगा। दोस्तों जब हम कोई new blog या site बनाते हैं तब हमारे सामने बहुत से कारण होते हैं जिन्हे हमें हमेशा दिमाग में रखकर चलना पड़ता है जैसे blog या website name और Domain Name. यदि...
- पाल वंश का संस्थापक गोपाल था
- पाल वंश की राजधानी मुंगेर थी
- इस वंश ने बिहार और अखण्डित बंगाल पर लगभग 750 से 1174 ई. तक शासन किया।
- इस दौरान गोपाल औदंतपुरी बिहार शरीफ में एक मठ तथा विश्वविद्यालय का निर्माण करवाया।
- जनता द्वारा गोपाल को सिंहासन पर आसीन किया गया था।
- वह योग्य और कुशल शासक था,
- गोपाल बौद्ध धर्म को मानते थे।
- धर्मपाल पाल वंश के गोपाल का पुत्र एवं उत्तराधिकारी था।
- पाल वंश का सबसे बड़ा सम्राट धर्मपाल था।
- धर्मपाल 770 से लेकर 810 ई. तक राज्य किया।
- धर्मपाल ने पश्चिम में पंजाब से लेकर पूर्व में बंगाल तक तथा उत्तर में हिमालय से लेकर दक्षिण में बरार तक अपनी शक्ति स्थापित की थी।
- धर्मपाल ने महाराजाधिराज परमेश्वर और परभट्टारक जैसी उपाधियाँ धारण की थीं।
- धर्मपाल बौद्ध धर्म का अनुयायी था
- धर्मपाल ने बोधगया में चतुर्भुज महादेव मंदिर की स्थापना की थी
- उसने भागलपुर जिले में स्थित विक्रमशिला विश्वविद्यालय का निर्माण करवाया था।
- उसके देखभाल के लिए सौ गाँव दान में दिये थे।
- धर्मपाल के बाद उसका पुत्र देवपाल गद्दी पर बैठा।
- देवपाल के शासनकाल में अरब यात्री सुलेमान आया था।
- देवपाल मुंगेर को अपनी राजधानी बनाई।
- उसने जावा के शासक बालपुत्रदेव के आग्रह पर नालन्दा में एक विहार की देखरेख के लिए 5 गाँव अनुदान में दिए।
- 810 से 978 ई. तक का समय पाल वंश के इतिहास का पतन काल माना जाता है।
पालवंश के शासक – गोपाल , धर्मपाल , देवपाल , विग्रहपाल , नारायणपाल , गोपाल द्वितीय , महिपाल प्रथम , नयपाल , महिपाल द्वितीय , रामपाल , गोपाल तृतीय , मदनपाल , गोविन्द पाल
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